उपवेद कितने हैं? — परंपरा के अनुसार उपवेद चार हैं: आयुर्वेद (चिकित्सा), धनुर्वेद (शस्त्र-विद्या और युद्धकला), गान्धर्ववेद (संगीत, नृत्य और नाट्य) तथा स्थापत्यवेद (वास्तु और शिल्प)। कुछ प्राचीन सूचियों में चौथे उपवेद के रूप में स्थापत्यवेद की जगह अर्थशास्त्र गिना गया है। नीचे हर उपवेद का अर्थ, उसका संबंधित वेद, मुख्य ग्रंथ और परीक्षा में होने वाली आम गलतियाँ विस्तार से दी गई हैं।
Table of Contents
- एक नज़र में
- उपवेद का अर्थ क्या है?
- चार उपवेद और उनके वेद — मुख्य तालिका
- उपवेदों पर मतभेद क्यों है?
- 1. आयुर्वेद (Ayurveda)
- 2. धनुर्वेद (Dhanurveda)
- 3. गान्धर्ववेद (Gandharvaveda)
- 4. स्थापत्यवेद / शिल्पवेद (Sthapatyaveda)
- अर्थशास्त्र को उपवेद क्यों माना गया?
- उपवेद, वेदांग और उपनिषद में अंतर
- याद रखने की आसान ट्रिक
- आम गलतियाँ जिनसे बचें
- आगे कहाँ पढ़ें
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- उपवेद कितने हैं और उनके नाम क्या हैं?
- कौन सा उपवेद किस वेद से संबंधित है?
- आयुर्वेद किस वेद का उपवेद है?
- गान्धर्ववेद किस वेद का उपवेद है?
- धनुर्वेद किस वेद का उपवेद है?
- उपवेद और वेदांग में क्या अंतर है?
एक नज़र में
- उपवेदों की संख्या: 4
- नाम: आयुर्वेद, धनुर्वेद, गान्धर्ववेद, स्थापत्यवेद (कुछ सूचियों में अर्थशास्त्र)
- “उपवेद” का अर्थ: वेद के निकट या उससे निकली हुई व्यावहारिक (applied) विद्या
- प्रमुख स्रोत: चरणव्यूह (शौनक-परंपरा से जुड़ा ग्रंथ), मधुसूदन सरस्वती का प्रस्थानभेद
- सबसे प्रचलित क्रम: ऋग्वेद–आयुर्वेद, यजुर्वेद–धनुर्वेद, सामवेद–गान्धर्ववेद, अथर्ववेद–स्थापत्यवेद/अर्थशास्त्र
- ध्यान दें: किस उपवेद को किस वेद से जोड़ा जाए, इस पर ग्रंथों में मतभेद है
उपवेद का अर्थ क्या है?
“उपवेद” दो शब्दों से बना है — उप (निकट, सहायक, गौण) और वेद (ज्ञान)। यानी वह विद्या जो वेद के पास रहकर उसके ज्ञान को जीवन के व्यावहारिक क्षेत्र में उतारती है। भारत सरकार के वैदिक हेरिटेज पोर्टल के अनुसार उपवेद का अर्थ है “applied knowledge” — तकनीकी या प्रायोगिक विषय, जिन्हें परंपरागत साहित्य में वेदों से जोड़ा गया।
आसान भाषा में समझें: चारों वेद मुख्य रूप से मंत्र, यज्ञ, स्तुति और दर्शन के ग्रंथ हैं। उपवेद वे शास्त्र हैं जो स्वास्थ्य, रक्षा, कला और निर्माण जैसे रोज़मर्रा के क्षेत्रों को वेद की छत्रछाया में रखते हैं।
चार उपवेद और उनके वेद — मुख्य तालिका
| उपवेद | विषय | संबंधित वेद (प्रचलित मत) | प्रमुख ग्रंथ / आचार्य |
|---|---|---|---|
| आयुर्वेद | चिकित्सा, स्वास्थ्य, दीर्घायु | ऋग्वेद (सुश्रुत के अनुसार अथर्ववेद) | चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय (वाग्भट) |
| धनुर्वेद | धनुर्विद्या, शस्त्र-विद्या, सैन्य-कला | यजुर्वेद | परंपरा में विश्वामित्र प्रवर्तक; वसिष्ठ धनुर्वेद संहिता, कोदण्ड मण्डन |
| गान्धर्ववेद | संगीत, नृत्य, नाट्य | सामवेद | भरतमुनि का नाट्यशास्त्र, मतंग का बृहद्देशी, शार्ङ्गदेव का संगीत रत्नाकर |
| स्थापत्यवेद (शिल्पशास्त्र) | वास्तु, भवन-निर्माण, मूर्ति व शिल्प | अथर्ववेद | मानसार, मयमतम्, समरांगण सूत्रधार (राजा भोज को श्रेय) |
| अर्थशास्त्र (वैकल्पिक सूची) | राजनीति, अर्थव्यवस्था, शासन | अथर्ववेद | कौटिल्य (चाणक्य) का अर्थशास्त्र |
उपवेदों पर मतभेद क्यों है?
यह बात बहुत कम लेखों में साफ़ लिखी जाती है, इसलिए ध्यान से पढ़ें। अलग-अलग ग्रंथ और विद्वान उपवेदों को अलग-अलग वेदों से जोड़ते हैं:
- वैदिक हेरिटेज पोर्टल (चरणव्यूह के हवाले से): आयुर्वेद–ऋग्वेद, धनुर्वेद–यजुर्वेद, गान्धर्ववेद–सामवेद, अर्थशास्त्र–अथर्ववेद।
- सुश्रुत संहिता: आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपांग बताती है। अथर्ववेद में रोगों, औषधियों और उपचार से जुड़े अनेक सूक्त हैं, इसलिए यह संबंध स्वाभाविक लगता है।
- कुछ अन्य सूचियाँ: स्थापत्यवेद को ऋग्वेद से और आयुर्वेद को अथर्ववेद से जोड़ती हैं।
- हिंदी पाठ्यपुस्तकों और प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः यही क्रम पढ़ाया जाता है: ऋग्वेद–आयुर्वेद, यजुर्वेद–धनुर्वेद, सामवेद–गान्धर्ववेद, अथर्ववेद–स्थापत्यवेद (या शिल्पवेद)।
भारतकोश और हिंदी विकिपीडिया दोनों ही स्पष्ट लिखते हैं कि इस वर्गीकरण पर विद्वानों में एकमत नहीं है। इसलिए परीक्षा में वही उत्तर दें जो आपकी पाठ्यपुस्तक या परीक्षा-संस्था मानती है, और लेख या निबंध में मतभेद का उल्लेख ज़रूर करें।
1. आयुर्वेद (Ayurveda)
आयुर्वेद का अर्थ है “आयु का ज्ञान” — जीवन को स्वस्थ और दीर्घ बनाने की विद्या। परंपरा में धन्वन्तरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है। इसके तीन सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ — चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और वाग्भट का अष्टांग हृदय — “बृहत्त्रयी” कहलाते हैं। सुश्रुत संहिता शल्य-चिकित्सा (सर्जरी) के विस्तृत वर्णन के लिए जानी जाती है।
आयुर्वेद को आठ अंगों में बाँटा गया है, इसलिए इसे “अष्टांग आयुर्वेद” भी कहते हैं:
- काय चिकित्सा — सामान्य चिकित्सा
- बाल चिकित्सा (कौमारभृत्य) — बच्चों का उपचार
- ग्रह चिकित्सा (भूत विद्या) — मानसिक रोगों से जुड़ा परंपरागत विभाग
- ऊर्ध्वांग चिकित्सा (शालाक्य) — आँख, कान, नाक, गला और सिर के रोग
- शल्य चिकित्सा — सर्जरी
- दंष्ट्रा चिकित्सा (अगद तंत्र) — विष-चिकित्सा
- जरा चिकित्सा (रसायन) — वृद्धावस्था और कायाकल्प
- वृष चिकित्सा (वाजीकरण) — प्रजनन स्वास्थ्य
आज भारत में आयुर्वेद आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक मान्यता-प्राप्त चिकित्सा पद्धति है। घर में उगाए जा सकने वाले औषधीय पौधों के बारे में जानने के लिए हमारा लेख घर के लिए आयुर्वेदिक पौधे पढ़ें। किसी भी रोग में दवा शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह ज़रूर लें।
2. धनुर्वेद (Dhanurveda)
धनुर्वेद शब्द “धनुष” से बना है, पर इसका दायरा केवल तीरंदाज़ी तक सीमित नहीं। इसमें शस्त्रों का निर्माण और प्रयोग, सैनिकों का प्रशिक्षण, व्यूह-रचना और युद्ध-नीति शामिल है। परंपरा में महर्षि विश्वामित्र को इसका प्रवर्तक माना गया है, और “वसिष्ठ धनुर्वेद संहिता” जैसे ग्रंथ इस विद्या से जुड़े हैं। अग्नि पुराण में भी धनुर्वेद पर अध्याय मिलते हैं।
परंपरागत ग्रंथ शस्त्रों को उनके प्रयोग के आधार पर बाँटते हैं — जैसे मुक्त (फेंके जाने वाले, जैसे बाण), अमुक्त (हाथ में रहने वाले, जैसे तलवार) आदि। रामायण और महाभारत में राम, अर्जुन और द्रोणाचार्य जैसे पात्रों की धनुर्विद्या इसी परंपरा से जुड़ी मानी जाती है।
3. गान्धर्ववेद (Gandharvaveda)
गान्धर्ववेद संगीत, नृत्य और नाट्य की विद्या है। इसका संबंध सामवेद से इसलिए जोड़ा जाता है क्योंकि सामवेद के मंत्र गाए जाते हैं — भारतीय संगीत की जड़ें सामगान में मानी जाती हैं। “गान्धर्व” नाम देवलोक के गायक-वादक गन्धर्वों से आया है।
इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ भरतमुनि का नाट्यशास्त्र है, जिसमें नाटक, अभिनय, नृत्य, संगीत और रस-सिद्धांत का विस्तृत विवेचन है। बाद के ग्रंथों में मतंग का बृहद्देशी और 13वीं शताब्दी में शार्ङ्गदेव का संगीत रत्नाकर बहुत महत्वपूर्ण हैं। सात स्वर — सा, रे, ग, म, प, ध, नि — इसी परंपरा की देन हैं।
4. स्थापत्यवेद / शिल्पवेद (Sthapatyaveda)
स्थापत्यवेद भवन, मंदिर, नगर, मूर्ति और शिल्प-निर्माण की विद्या है। इसे शिल्पशास्त्र और वास्तुशास्त्र से जोड़ा जाता है। मानसार, मयमतम् और राजा भोज को समर्पित समरांगण सूत्रधार इसके प्रसिद्ध ग्रंथ हैं, जिनमें माप, अनुपात, दिशा और निर्माण-सामग्री पर नियम मिलते हैं। परंपरा में विश्वकर्मा को शिल्प का देवता माना जाता है।
ध्यान रखें कि वास्तु के कई आधुनिक “नियम” (जैसे किसी दिशा में कुछ रखने से धन या रोग पर असर) पारंपरिक मान्यताएँ हैं, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं। इन ग्रंथों का ऐतिहासिक महत्व मंदिर-स्थापत्य और नगर-नियोजन के ज्ञान में है।
अर्थशास्त्र को उपवेद क्यों माना गया?
कुछ सूचियों में — जिनमें वैदिक हेरिटेज पोर्टल द्वारा उद्धृत चरणव्यूह भी है — चौथा उपवेद अर्थशास्त्र है, जिसे अथर्ववेद से जोड़ा गया है। इसमें राज्य-व्यवस्था, कर, व्यापार, न्याय और कूटनीति का ज्ञान है। सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ कौटिल्य (चाणक्य) का अर्थशास्त्र है। अथर्ववेद में राजा, राष्ट्र और समाज से जुड़े सूक्त होने के कारण यह संबंध जोड़ा जाता है।
उपवेद, वेदांग और उपनिषद में अंतर
परीक्षाओं में सबसे ज़्यादा भ्रम इन तीन शब्दों को लेकर होता है। नीचे की तालिका से अंतर तुरंत समझ आएगा:
| श्रेणी | संख्या | उद्देश्य | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| उपवेद | 4 | वेद-ज्ञान का व्यावहारिक प्रयोग (स्वास्थ्य, रक्षा, कला, निर्माण) | आयुर्वेद, धनुर्वेद, गान्धर्ववेद, स्थापत्यवेद |
| वेदांग | 6 | वेद को सही पढ़ने, समझने और यज्ञ में प्रयोग करने के सहायक शास्त्र | शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष |
| उपनिषद | 108 (मुक्तिका सूची); 10–13 प्रमुख | वेदों का दार्शनिक भाग — आत्मा और ब्रह्म का ज्ञान | ईश, केन, कठ, छान्दोग्य, बृहदारण्यक |
वेदांगों के बारे में विस्तार से पढ़ें: वेदांग कितने हैं — 6 वेदांगों की पूरी जानकारी।
याद रखने की आसान ट्रिक
क्रम याद रखने के लिए यह वाक्य बोलें: “ऋषि आयु, यज्ञ धनुष, साम गान, अथर्व भवन।”
- ऋग्वेद → आयुर्वेद
- यजुर्वेद → धनुर्वेद (यज्ञ और युद्ध दोनों में विधि-विधान)
- सामवेद → गान्धर्ववेद (साम = गान)
- अथर्ववेद → स्थापत्यवेद (भवन) या अर्थशास्त्र
आम गलतियाँ जिनसे बचें
- उपवेद और वेदांग को एक समझना: उपवेद 4 हैं, वेदांग 6। ज्योतिष वेदांग है, उपवेद नहीं।
- आयुर्वेद को केवल अथर्ववेद से जोड़ना या केवल ऋग्वेद से: दोनों मत मौजूद हैं। परीक्षा में अपनी पाठ्यपुस्तक का क्रम मानें।
- “गंधर्व वेद” को अलग पाँचवाँ वेद समझना: यह उपवेद है, चार वेदों की तरह संहिता नहीं।
- उपवेदों को वेदों जितना प्राचीन मानना: चरक, सुश्रुत, नाट्यशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे ग्रंथ वैदिक संहिताओं से काफ़ी बाद के हैं, भले ही उनकी परंपरा वेदों से जोड़ी जाती हो।
- पारंपरिक मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्य बताना: वास्तु या किसी उपचार के दावों को “विज्ञान द्वारा सिद्ध” कहने से पहले प्रमाण देखें।
आगे कहाँ पढ़ें
मूल जानकारी के लिए भारत सरकार के वैदिक हेरिटेज पोर्टल का उपवेद पृष्ठ और हिंदी विकिपीडिया पर उपवेद लेख उपयोगी हैं। वेद-परंपरा को प्रत्यक्ष रूप में देखने के लिए नोएडा का वेद वन पार्क भी देख सकते हैं, जहाँ वेदों और ऋषियों से जुड़ी झाँकियाँ बनाई गई हैं।
संक्षेप में, उपवेद चार हैं और ये दिखाते हैं कि वैदिक परंपरा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं थी — स्वास्थ्य, सुरक्षा, कला और निर्माण भी उसी ज्ञान-परंपरा का हिस्सा माने गए। नाम याद रखें, पर यह भी याद रखें कि किस उपवेद को किस वेद से जोड़ा जाए, इस पर एक से अधिक प्रामाणिक मत मौजूद हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
उपवेद कितने हैं और उनके नाम क्या हैं?
उपवेद चार हैं — आयुर्वेद (चिकित्सा), धनुर्वेद (शस्त्र-विद्या), गान्धर्ववेद (संगीत और नृत्य) और स्थापत्यवेद (वास्तु और शिल्प)। कुछ प्राचीन सूचियों, जैसे चरणव्यूह, में स्थापत्यवेद की जगह अर्थशास्त्र को चौथा उपवेद माना गया है।
कौन सा उपवेद किस वेद से संबंधित है?
प्रचलित मत के अनुसार ऋग्वेद का उपवेद आयुर्वेद, यजुर्वेद का धनुर्वेद, सामवेद का गान्धर्ववेद और अथर्ववेद का स्थापत्यवेद (या अर्थशास्त्र) है। सुश्रुत संहिता आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपांग मानती है, इसलिए इस पर मतभेद है।
आयुर्वेद किस वेद का उपवेद है?
चरणव्यूह और अधिकांश हिंदी पाठ्यपुस्तकें आयुर्वेद को ऋग्वेद का उपवेद बताती हैं। वहीं सुश्रुत संहिता इसे अथर्ववेद का उपांग कहती है, क्योंकि अथर्ववेद में रोग और औषधियों से जुड़े कई सूक्त हैं। परीक्षा में अपनी पाठ्यपुस्तक का उत्तर लिखें।
गान्धर्ववेद किस वेद का उपवेद है?
गान्धर्ववेद सामवेद का उपवेद है। सामवेद के मंत्र गाए जाते हैं, इसलिए भारतीय संगीत की जड़ें सामगान में मानी जाती हैं। इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ भरतमुनि का नाट्यशास्त्र है।
धनुर्वेद किस वेद का उपवेद है?
धनुर्वेद यजुर्वेद का उपवेद माना जाता है। इसमें धनुर्विद्या के साथ शस्त्रों का प्रयोग, सैनिक प्रशिक्षण और युद्ध-नीति शामिल है। परंपरा में महर्षि विश्वामित्र को इसका प्रवर्तक माना गया है, और रामायण-महाभारत की धनुर्विद्या इसी परंपरा से जोड़ी जाती है।
उपवेद और वेदांग में क्या अंतर है?
उपवेद (4) वेद-ज्ञान के व्यावहारिक प्रयोग हैं, जैसे चिकित्सा, युद्धकला, संगीत और स्थापत्य। वेदांग (6) — शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष — वेदों को सही उच्चारण, अर्थ और विधि से पढ़ने के सहायक शास्त्र हैं।
